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Monday, 17 August 2020

जाती के आधार पर आरक्षण SC, ST, OBC समाज के साथ ही एक छलावा तो नहीं ?


--रितेश कश्यप
@meriteshkashyap

भारत में 73% जनता गरीब है. आंकड़ों की ही अगर बात करें तो यूनाइटेड नेशन के हिसाब से हमारे देश की कुल आबादी 135 करोड़ है जिसका 73% आबादी यानी लगभग 99 करोड़ लोग गरीब की श्रेणी में आते हैं । वहीँ 135 करोड़ की जनता में 70% आबादी जिसमे लगभग 95 करोड़ लोग SC, ST, OBC समाज से आते हैं ।

पुरे देश में 95 करोड़ आबादी SC, ST, OBC और उसमे 73% लगभग 69 करोड़ लोग अभी भी गरीब है । वहीँ 40 करोड़ आबादी General (सामान्य) जाती की है जिसका 73% लगभग 29 करोड़ लोग गरीब हैं ।

अब अगर आर्थिक रूप से भी आरक्षण दिया जाए तो SC, ST, OBC के 69 करोड़ लोगों की सीधे तौर से लाभ मिलगा जबकि सामान्य जाती के 29 करोड़ गरीब लोग भी इसका लाभ उठा सकेंगे।

मगर सरकार आर्थिक आरक्षण लागू नहीं करेगी कभी इसका कारण किसी ने सोचा है की आखिर क्यों ?

आइये एक बार फिर आंकड़ों पे नजर डालते हैं । 95 करोड़ SC, ST, OBC के समाज में 27 करोड़ लोग हर आधार पर संपन्न हैं जिसमे आईएस, आईपीएस, राजनेता , सरकारी पद, व्यापार आदि में कार्यरत हैं जिन्हें इस आरक्षण का लाभ मिलना बंद हो जायेगा । यही लोग बचे 69 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व भी करते हैं जिन्हें सही मायने में आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए था ।

एक उदाहरण से इन बातों को समझने का प्रयास करें । मान लेते हैं की आप SC समुदाय से आते हैं और आप एक बड़े सरकारी पदाधिकारी भी हैं । अब अगर कहीं किसी नेता ने 100 या 200 रूपए या एक बोतल शराब का लालच देकर आपको उनकी सभा में बुलाया जाए तो आप जायेंगे क्या ? हाँ यही पैसा उन्ही के समुदाय के गरीब लोगों को दिया जाए तो वह बिलकुल जायेगा । ठीक इसी तरह हर समाज में होता आ रहा है जिसमे अल्पसंख्यक समाज में मुस्लिम समुदाय की भी बात कर सकते हैं । कुल मिलाकर आरक्षण के नाम पर गरीबों को गरीब ही रहने देने का षड्यंत्र है जो पिछले 70 सालों से होता आ रहा है ।

अब बात करेंगे की आर्थिक रूप से आरक्षण की तो SC, ST, OBC समाज के 27% लोगों को भारी नुकसान हो जायेगा जो ये कभी होने नहीं देंगे। SC, ST, OBC समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले यही 27% लोगों ने आज तक अपने ही समाज के लोगों का जीवन स्तर सुधारने का प्रयास क्यों नहीं किया ? जीवन स्तर सुधारने की जगह उन्हें आरक्षण के नाम पर बड़े बड़े सपने दिखा कर उन्हें बरगलाया जाता रहा है। भीड़ का हिस्सा हमेशा गरीब होता आया है वह चाहे किसी भी समाज से क्यों ना आता हो।


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