कहीं इस देश में 1947 को दोहराने की तैयारी तो नहीं चल रही है? - Abhivyakti | अभिव्यक्ति

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Sunday, 22 December 2019

कहीं इस देश में 1947 को दोहराने की तैयारी तो नहीं चल रही है?


रितेश कश्यप
पत्रकार एवं लेखक

भारत में नागरिक संशोधन बिल का विरोध किया जा रहा है और इस विरोध में पूरा देश धीरे धीरे जलना शुरू हो चुका है। यह किसी को नहीं पता की इस नागरिक संशोधन बिल में इस देश के मुसलमान भाइयों ने ऐसा क्या देख लिया है जिसका विरोध किया जा रहा है क्योंकि सच्चाई तो यही है कि इस नागरिक संशोधन बिल के अंतर्गत किसी की नागरिकता नहीं छीनी जा रही है मगर वर्तमान सरकार के विरोध करने वाली पार्टियां उन्हें बरगला कर अपने लिए वापस एक जगह बनाने की कोशिश कर रही है।

जिन लोगों को इतिहास में रुचि होगी उन लोगों ने देश के बंटवारे का इतिहास जरूर पढ़ा होगा। सन 1947 में इस देश को दो भागों में बांटा गया था एक भाग हिंदुस्तान था और दूसरा भाग पाकिस्तान बना। आपको पता ही होगा कि पाकिस्तान को धर्म के आधार पर बांटा गया था।

सभी इतिहास प्रेमियों को यह भी पता होगा की 1947 के बंटवारे से पहले इस देश में क्या क्या हुआ था। उस वक्त इस अखंड भारत को तोड़ने के लिए एक बहुत बड़ी योजना बनाई गई थी। उस योजना के तहत तत्कालीन कांग्रेस के बुजुर्ग नेता, हिंदूवादी संगठन, साथ ही अन्य देशभक्त लोग देश तोड़ने के खिलाफ थे, मगर विरोधियों और बुद्धिजीवियों ने एक रणनीति के तहत इसी देश के सभी मुसलमान भाइयों को यह बताने में सफल हो गए कि इस देश में मुसलमानों के लिए कोई जगह नहीं है । देश की स्वतंत्रता के बाद मुसलमान इस देश में सुरक्षित नहीं रहेंगे। यह डर मुसलमान समुदाय में इस कदर व्याप्त हो गया कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, बंगाल से लेकर महाराष्ट्र तक देश दंगे की आग में जल उठा। अंत में तत्कालीन कांग्रेस के नेताओं को यह लगा कि इस तरीके से इस देश की गद्दी उनके हाथ से जा सकती है सो उन्होंने मुस्लिम लीग के नेता जिन्ना की बात मान ली। उस वक्त वृद्ध हो चले महात्मा गांधी की बात कोई नहीं सुन रहा था । वह बार-बार यह कह रहे थे कि पाकिस्तान अगर बनेगा तो वह उनकी लाश पर बनेगा। उनकी हालत वैसी ही थी  जैसे एक घर में किसी बुजुर्ग से सिर्फ अंतिम बार आशीर्वाद लेने जाया जाता है। उसी तरह से इस देश के बापू कहे जाने वाले और अखंड भारत का सपना संजोये महात्मा गांधी से वही अंतिम आशीर्वाद लिया गया जबकि निर्णय पहले ही ले लिया गया था। सबसे बड़ी बात यह थी कि इस बंटवारे का दोष भी महात्मा गांधी को ही लगा और असली गुनहगार मजे में रहे।
लाखों हिंदू और मुसलमान इस अग्नि में स्वाहा हो गए क्योंकि एक तरफ भारत की सत्ता जवाहरलाल नेहरु चाहते थे दूसरी तरफ मुसलमानों के लिए अलग देश बना कर जिन्ना उस पर काबिज होना चाहते थे।
इन दोनों के स्वार्थ ने लाखों लोगों की लाश पर इस अखंड भारत के टुकड़े कर दिए।

आज 2019 का साल चल रहा है और माहौल वैसा ही पैदा किया जा रहा है। अंतर सिर्फ इतना है कि पहले स्वार्थी लोगों के हाथ में इस देश की चाबी थी आज राष्ट्र वादियों के हाथ में इस देश की चाबी है। आज भी उसी परिस्थिति को पैदा किया जा रहा है और यह माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है कि मुसलमानों को इस देश में रहने नहीं दिया जाएगा, मुसलमानों की नागरिकता छीन ली जाएगी, मुसलमान इस देश में सुरक्षित नहीं है।
यही कारण है कि हमारे इस देश के मुसलमान भाई इस डर के माहौल में हथियार उठाने को तैयार हो गए और इस देश के टुकड़े करने को तैयार हो रहे हैं।

मैं सभी राष्ट्र वादियों से यह अपील करना चाहता हूं कि इस देश को दुबारा टूटने से बचा लिया जाए उसके लिए हम सभी भारत वासियों को एक राष्ट्रव्यापी मुहिम चलाने की जरूरत है जिसमें हम सभी अफवाहों से बचें और अन्य समुदाय के लोगों को भी बचाएं।

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