आज परम पूज्य डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार जी का सपना साकार होता दिखाई दे रहा है।
कुछ समय पहले ऐसा माहौल तैयार हो चुका था की जो व्यक्ति हिंदू या हिंदुत्व की बात करे वह व्यक्ति संप्रदायिकता का मूर्त रूप माना जाता था और जो अन्य धर्मों की बात करें या सिर्फ अन्य धर्मों की ही बात करें उसे धर्मनिरपेक्षता का तमगा दिया जाता था।
आज ऐसा क्या हो गया की भारत के चारों ओर हर राजनेता या राजनैतिक दल हिंदू और हिंदुत्व की बातें कर रहे हैं। आज ऐसा क्या हो गया की हिंदू लोग अब बहुत उत्कृष्ट दिखाई देने लगे।
कांग्रेस के महान नेताओं ने जिन्होंने हिंदुओं को कभी भी तवज्जो नहीं दिया और तो और हिंदुओं को आतंकवादी, राज द्रोही कह देने वालों की कमी नहीं रही, आज ऐसा कौन सा करिश्मा हो गया कि उन्हें अपने आप को हिंदू सिद्ध करने के लिए हर हथकंडा अपनाना पड़ रहा है। एक समय था जब भारत के प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा था की "मैं दुर्घटनावश हिंदू हूं" "I Am Accidentally Hindu" . आज उन ही के परनाती राहुल गांधी को अपने परनाना का गोत्र बताने की जरूरत आ पड़ी है।
कांग्रेस ने तो कभी सोचा भी ना होगा की उन लोगों को भी अपने आप को हिंदू साबित करना पड़ सकता है, क्योंकि उनके सिद्धांतों के अनुसार हिंदू की राजनीति सिर्फ सांप्रदायिक लोग ही कर सकते थे।
कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी ने तो यहां तक कह दिया कि भारत के हर संसाधन पर सबसे पहला अधिकार सिर्फ एक ही संप्रदाय का है।
एक समय वीर सावरकर ने कहा था कि अगर सारे हिंदू एक हो जाएं तो कांग्रेस के नेता अपने कोर्ट के ऊपर भी जनेऊ पहनने से बाज नहीं आएंगे । वीर सावरकर की भविष्यवाणी को पूरा करने के लिए राहुल गांधी जी का अवतरण हुआ और वीर सावरकर की भविष्यवाणी सच साबित हुई। आज राहुल गांधी को कभी कोर्ट के ऊपर भी जनेऊ पहनना पड़ रहा है, कभी अपने गोत्र को अपने नाना जी के खानदान से गोद लेना पड़ रहा है, और इन सब का कारण यह है कि उन्हें अपने आप को हिंदू और हिंदुत्व का समर्थक साबित करने में सहूलियत हो सके ।
घोर आश्चर्य की बात तो यह है की इन 70 सालों के अनुभव में उन लोगों को अभी तक यह नहीं समझ आ रहा कि हिंदू बेवकूफ एक बार बन सकता है मगर बार बार बनने के लिए हिंदुओं में भी क्षमता नहीं है।
ऐसा नहीं है कि हिंदुओं को लुभाने के लिए कांग्रेस पार्टी ही सारे हथकंडे अपना रही है, हिंदुओं की और हिंदू मान्यताओं की विरोधी महबूबा मुफ्ती ने भी अब हिंदुओं को साधने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को खत लिखा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पर जो माता का मंदिर जैसे शारदा पीठ, कटासराज उसे हिंदुओं के लिए खुलवाया जाए और इसके लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से बात की जाए। इस खत के जरिये महबूबा मुफ्ती का हिंदुओं के प्रति कृत्रिम रुझान , क्या दर्शाने का प्रयास कर रहा है ?
जिन्हें कश्मीर में पंडितों के लिए कोई दर्द नहीं दिखाई दे पा रहा उन्हें हिंदुओं का मंदिर दिखाई देने लगा आश्चर्य है। आश्चर्य है कि जो पत्थरबाज भारत के सैनिकों के ऊपर पत्थरों की बारिश कर रहे हैं उनकी पैरवी करते हुए जिसे शर्म नहीं आती थी वह भारत की संस्कृति और हिंदुओं का पक्षधर होने का स्वांग रच रहे हैं।
कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और कक्ष से लेकर मिजोरम तक सभी जगह के राजनैतिक महारथी अब अपनी तुष्टीकरण की नीति छोड़ हिंदुत्व और हिंदू हित की राजनीति का आरंभ कर चुके हैं।
आखिर क्या हो गया भारत के अंदर की जहां हिंदुओं को हमेशा हेय दृष्टि से देखा जाता था या उपेक्षित नजरों से देखा जाता था आज उसी हिंदू को सभी राजनैतिक दलों अपने सर का ताज बनाने की होड़ में लग चुके हैं।
मित्रों सबसे ऊपर पहली लाइन में मैंने लिखा था की आज परम पूज्य डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार जी का सपना साकार होता दिखाई दे रहा है । डॉक्टर साहब ने कभी कहा था जिस दिन सारे हिंदू एक हो जाएंगे उस दिन से हमारे देश के और हमारे देश में रहने वाले हर व्यक्ति को हर तरह से मान-सम्मान मिलेगा वह व्यक्ति चाहे किसी भी पंथ का या धर्म का हो ।
संघ के जन्मकाल के समय की परिस्थिति बड़ी विचित्र सी थी, हिंदुओं का हिन्दुस्थान कहना उस समय निरा पागलपन समझा जाता था और किसी संगठन को हिंदू संगठन कहना देश द्रोह तक घोषित कर दिया जाता था” (राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ तत्व और व्यवहार पृष्ठ ६४)
मगर आज यह स्थिति बिल्कुल विपरीत हो चुकी है । हिंदू ही राष्ट्र और राष्ट्रीयता का प्रतीक माना जाने लगा है और इस बात को तुष्टीकरण करने वाले भी जान चुके हैं और इस बात को उनके क्रियाकलापों से भी जाना जा सकता है।
लेख: रितेश कश्यप
Twitter : meriteshkashyap
कुछ समय पहले ऐसा माहौल तैयार हो चुका था की जो व्यक्ति हिंदू या हिंदुत्व की बात करे वह व्यक्ति संप्रदायिकता का मूर्त रूप माना जाता था और जो अन्य धर्मों की बात करें या सिर्फ अन्य धर्मों की ही बात करें उसे धर्मनिरपेक्षता का तमगा दिया जाता था।
आज ऐसा क्या हो गया की भारत के चारों ओर हर राजनेता या राजनैतिक दल हिंदू और हिंदुत्व की बातें कर रहे हैं। आज ऐसा क्या हो गया की हिंदू लोग अब बहुत उत्कृष्ट दिखाई देने लगे।
कांग्रेस के महान नेताओं ने जिन्होंने हिंदुओं को कभी भी तवज्जो नहीं दिया और तो और हिंदुओं को आतंकवादी, राज द्रोही कह देने वालों की कमी नहीं रही, आज ऐसा कौन सा करिश्मा हो गया कि उन्हें अपने आप को हिंदू सिद्ध करने के लिए हर हथकंडा अपनाना पड़ रहा है। एक समय था जब भारत के प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा था की "मैं दुर्घटनावश हिंदू हूं" "I Am Accidentally Hindu" . आज उन ही के परनाती राहुल गांधी को अपने परनाना का गोत्र बताने की जरूरत आ पड़ी है।
कांग्रेस ने तो कभी सोचा भी ना होगा की उन लोगों को भी अपने आप को हिंदू साबित करना पड़ सकता है, क्योंकि उनके सिद्धांतों के अनुसार हिंदू की राजनीति सिर्फ सांप्रदायिक लोग ही कर सकते थे।
कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी ने तो यहां तक कह दिया कि भारत के हर संसाधन पर सबसे पहला अधिकार सिर्फ एक ही संप्रदाय का है।
एक समय वीर सावरकर ने कहा था कि अगर सारे हिंदू एक हो जाएं तो कांग्रेस के नेता अपने कोर्ट के ऊपर भी जनेऊ पहनने से बाज नहीं आएंगे । वीर सावरकर की भविष्यवाणी को पूरा करने के लिए राहुल गांधी जी का अवतरण हुआ और वीर सावरकर की भविष्यवाणी सच साबित हुई। आज राहुल गांधी को कभी कोर्ट के ऊपर भी जनेऊ पहनना पड़ रहा है, कभी अपने गोत्र को अपने नाना जी के खानदान से गोद लेना पड़ रहा है, और इन सब का कारण यह है कि उन्हें अपने आप को हिंदू और हिंदुत्व का समर्थक साबित करने में सहूलियत हो सके ।
घोर आश्चर्य की बात तो यह है की इन 70 सालों के अनुभव में उन लोगों को अभी तक यह नहीं समझ आ रहा कि हिंदू बेवकूफ एक बार बन सकता है मगर बार बार बनने के लिए हिंदुओं में भी क्षमता नहीं है।
ऐसा नहीं है कि हिंदुओं को लुभाने के लिए कांग्रेस पार्टी ही सारे हथकंडे अपना रही है, हिंदुओं की और हिंदू मान्यताओं की विरोधी महबूबा मुफ्ती ने भी अब हिंदुओं को साधने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को खत लिखा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पर जो माता का मंदिर जैसे शारदा पीठ, कटासराज उसे हिंदुओं के लिए खुलवाया जाए और इसके लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से बात की जाए। इस खत के जरिये महबूबा मुफ्ती का हिंदुओं के प्रति कृत्रिम रुझान , क्या दर्शाने का प्रयास कर रहा है ?
जिन्हें कश्मीर में पंडितों के लिए कोई दर्द नहीं दिखाई दे पा रहा उन्हें हिंदुओं का मंदिर दिखाई देने लगा आश्चर्य है। आश्चर्य है कि जो पत्थरबाज भारत के सैनिकों के ऊपर पत्थरों की बारिश कर रहे हैं उनकी पैरवी करते हुए जिसे शर्म नहीं आती थी वह भारत की संस्कृति और हिंदुओं का पक्षधर होने का स्वांग रच रहे हैं।
कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और कक्ष से लेकर मिजोरम तक सभी जगह के राजनैतिक महारथी अब अपनी तुष्टीकरण की नीति छोड़ हिंदुत्व और हिंदू हित की राजनीति का आरंभ कर चुके हैं।
आखिर क्या हो गया भारत के अंदर की जहां हिंदुओं को हमेशा हेय दृष्टि से देखा जाता था या उपेक्षित नजरों से देखा जाता था आज उसी हिंदू को सभी राजनैतिक दलों अपने सर का ताज बनाने की होड़ में लग चुके हैं।
मित्रों सबसे ऊपर पहली लाइन में मैंने लिखा था की आज परम पूज्य डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार जी का सपना साकार होता दिखाई दे रहा है । डॉक्टर साहब ने कभी कहा था जिस दिन सारे हिंदू एक हो जाएंगे उस दिन से हमारे देश के और हमारे देश में रहने वाले हर व्यक्ति को हर तरह से मान-सम्मान मिलेगा वह व्यक्ति चाहे किसी भी पंथ का या धर्म का हो ।
संघ के जन्मकाल के समय की परिस्थिति बड़ी विचित्र सी थी, हिंदुओं का हिन्दुस्थान कहना उस समय निरा पागलपन समझा जाता था और किसी संगठन को हिंदू संगठन कहना देश द्रोह तक घोषित कर दिया जाता था” (राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ तत्व और व्यवहार पृष्ठ ६४)
लेख: रितेश कश्यप
Twitter : meriteshkashyap


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