टीपू सुल्तान का महिमामंडन या तुष्टिकरण ? - Abhivyakti | अभिव्यक्ति

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Saturday, 10 November 2018

टीपू सुल्तान का महिमामंडन या तुष्टिकरण ?

नमस्कार मित्रों,

आज टीवी पर डिबेट देख रहा था और डिबेट का विषय था टीपू सुल्तान का जन्मदिन।

बड़ा ही अजीब लगता है की हम भारत के लोग टीपू सुल्तान के विषय में बहस कर रहे हैं और बहस में दोनों और यही इसी भारत के लोग रहते हैं एक समर्थन में रहता है और एक विरोध में। सबसे पहले तो मुझे यह समझ ही नहीं आ रहा था की टीपू सुल्तान जैसे लोगों का भी एक समूह समर्थन करता है बावजूद इसके की  उसने इस समाज पर कितने अत्याचार, कितने जुल्म और सितम ढाए। पूरे घटनाक्रम को अगर करीब से देखने का प्रयास करेंगे तो दिखाई देगा की यहां तो सिर्फ और सिर्फ राजनीति है और वह भी गंदी राजनीति और इसमें शामिल होने वाले कुछ मीडिया हाउस और राजनीतिक दल दोनों का समावेश है।
कर्नाटक के मैसूर रियासत का राजा टीपू सुल्तान था। कहा जाता है की इतिहास हमेशा विजेता के द्वारा ही लिखा जाता है और आज की घटना क्रम कल के लिए इतिहास बन जाता है।
मगर एक तबका जो सिर्फ और सिर्फ इतिहास को और इतिहास के तथ्यों को तोड़ने और मरोड़ने में लगा हो तो इतिहास एक कहानी बनकर रह जाती है और वह किसी काम की नहीं रहती।
ऐसा ही कुछ टीपू सुल्तान और उसके इतिहास को लेकर हो चुका है। ऐसा सिर्फ टीपू सुल्तान के लिए ही नहीं हुआ ऐसा सभी मुगल शासकों के साथ हुआ है।
ऐसे शासकों के द्वारा जो अच्छा हुआ उसे खूब बढ़ा चढ़ाकर दिखाया गया मगर जो भी उन्होंने अन्याय किया, दुराचार किया उस इतिहास के पन्ने को दफना दिया गया।
कुछ ऐसा ही टीपू सुल्तान के इतिहास में हुआ । कहां जाता है कि 4 मई 1799 में ब्रिटिश फौज ने टीपू सुल्तान की हत्या कर दी मगर यह नहीं बताया जाता की मैसूर रियासत का सुल्तान ब्रिटिश सरकार से समझौता करके ही बनाया गया था।
कहा जाता है की मैसूर के लिए टीपू सुल्तान में कई लड़ाइयां लड़ी मगर यह नहीं बताया जाता की किस प्रकार कर्नाटक की मातृभाषा कन्नड़ को बदलकर फारसी कर दिया गया और वहां के कितने हिंदू मंदिरों को तोड़ा गया , कितने ईसाइयों को मारा गया कितने हिंदुओं के साथ कत्लेआम किया गया, ताकि उसका जिहाद चालू रहे और काफिरों पर फतेह का परचम लहराता रहे।
19 जनवरी, 1790 को बुरदुज जमाउन खान को एक पत्र में टीपू ने लिखा है, ‘क्या आपको पता है कि हाल ही में मैंने मालाबार पर एक बड़ी जीत दर्ज की है और चार लाख से ज्यादा हिन्दुओं का इस्लाम में कन्वर्जन करवाया है?’19वीं सदी में ब्रिटिश सरकार में अधिकारी रहे लेखक विलियम लोगान ने अपनी किताब ‘मालाबार मैनुअल’ में लिखा है कि कैसे टीपू ने अपने 30,000 सैनिकों के दल के साथ कालीकट में तबाही मचाई थी. टीपू हाथी पर सवार था और उसके पीछे उसकी विशाल सेना चल रही थी ।
कर्नाटक में काफी अधिक संख्या में हिंदू लोग रहा करते थे और लगभग एक लाख से भी ज्यादा हिंदुओं का जबरन धर्मांतरण करवाया गया और जो हिंदू अपने धर्म से विमुख नहीं हो रहे थे उन्हें कत्ल करने का आदेश टीपू सुल्तान ने पहले ही दे रखा था। हिंदू महिलाओं के साथ अत्याचार बलात्कार के कई किस्सों को इतिहासकारों ने छुपा लिया और छुपाने की बात तो दूर इसको किसी भी जगह पर उजागर नहीं होने के लिए हर प्रयास किया गया। हिंदू माताओं के सामने उनके बच्चों को मारकर उन्हीं के गले में लटका कर घुमाया गया जो सोच कर ही अत्यंत भयावह प्रतीत हो रहा है। कितनी ही नौजवान लड़कियों के साथ हर बुरी हरकत की गई जो इंसानियत को शर्मसार कर सकती है।
टीपू सुल्तान की अत्याचारों की कहानी हिंदुओं तक ही सीमित नहीं है उसके अत्याचार तो ईसाई धर्म के मानने वालों के साथ भी रहा। 70 हजार से भी ज्यादा ईसाइयों को मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया गया। और जिन्होंने उनके इस फरमान का विरोध किया उसका क़त्ल  कर दिया गया।
ईसाई नेता अल्बान मेनेजेस ने कहा है कि टीपू ने 1784 में मंगलौर के मिलेग्रेस चर्च को तहस-नहस कर दिया था. टीपू ने अंग्रेजों के लिए जासूसी के शक में 60 हजार कैथोलिकों को बंदी भी बना लिया था और उन्हें मैसूर तक पैदल चलने के लिए मजबूर किया था, जिस वजह से 4 हजार कैथोलिकों की मौत हो गई थी।
कुछ सालों पहले कांग्रेस का ही शासन काल था जब टीपू सुल्तान के महिमामंडन करने के लिए दूरदर्शन पर उसके नाम पर एक धारावाहिक चलाया गया ताकि लोगों में टीपू सुल्तान के प्रति सम्मान का भावना जगे और लोग उसे स्वतंत्रता सेनानी के रूप में देखने का प्रयास करें।
कुछ राजनीतिक दल के लिए टीपू सुल्तान हो या औरंगजेब उनके नजर में सब के सब भारत के हितैषी रहे हैं, क्योंकि उन लोगों को ऐसा लगता है कि अगर हम ऐसे क्रूर शासकों का भी महिमामंडन करेंगे तो शायद उन्हें मुस्लिम समर्थन देंगे और इसी बहाने उनकी तुष्टीकरण की नीति कामयाब हो जाएगी।
अब तो ऐसा लग रहा है की वह दिन दूर नहीं जब याकूब मेमन की जयंती या फिर ओसामा बिन लादेन की जयंती मनाने के लिए लोग आगे आ जाएंगे और जो लोग आगे आएंगे उनके समर्थन में तुष्टिकरण हेतु कुछ राजनीतिक दल उनका साथ देने से नहीं कतराएंगे और हम भारत के लोग किसी चैनल पर डिबेट देख रहे होंगे।

टीपू के तीन पत्र

टीपू ने हिन्दुओं पर अत्याचारों, कन्वर्जन के लिए कुर्ग, मलाबार के विभिन्न क्षेत्रों में अपने सेनानायकों को अनेक पत्र लिखे थे. लेकिन इतिहास की पुस्तकों से इन्हें गायब कर दिया गया.

(1) टीपू ने अब्दुल कादर को 22 मार्च 1788 को लिखा पत्र -‘12000 से अधिक हिन्दुओं को इस्लाम में कन्वर्ट किया गया. इनमें अनेक नम्बूदिरी थे. इस उपलब्धि का हिन्दुओं के बीच व्यापक प्रचार किया जाए, ताकि स्थानीय हिन्दुओं में भय व्याप्त हो और उन्हें इस्लाम में कन्वर्ट किया जाए, किसी भी नम्बूदिरी को छोड़ा न जाए.’

(2) 14 दिसम्बर 1788 को कालीकट के अपने सेनानायक को पत्र लिखा -‘मैं तुम्हारे पास मीर हुसैन अली के साथ अपने दो अनुयायी भेज रहा हूं. उनके साथ तुम सभी हिन्दुओं को बंदी बना लेना और यदि वे इस्लाम स्वीकार न करें तो उनकी हत्या कर देना. मेरा आदेश है कि 20 वर्ष से कम उम्र वालों को काराग्रह में डाल देना और शेष में से 5000 को पेड़ से लटकाकर मार डालना.’ (भाषा पोशनी-मलयालम जर्नल, अगस्त 1923)

(3) बदरुज्जमां खान को 19 जनवरी 1790 लिखा पत्र -‘क्या तुम्हें नहीं मालूम कि मैंने मलाबार में एक बड़ी विजय प्राप्त की है? चार लाख से अधिक हिन्दुओं को मुसलमान बना लिया गया. मैंने अब रमन नायर की ओर बढ़ने का निश्चय किया है ताकि उसकी प्रजा को इस्लाम में कन्वर्ट किया जाए. मैंने रंगपटनम वापस जाने का विचार त्याग दिया है.’
( लेख के कुछ अंश sanvad. in से भी लिए गए हैं)

लेख:  रितेश कश्यप
Twitter : meriteshkashyap
स्वतंत्र पत्रकार सह लेखक

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